बंदरगाहों (Ports) पर लेबर सरकारी (Permanent/Registered) और निजी (Private/Contractual) दोनों तरह से काम करते हैं, लेकिन अब ज्यादातर निजी ठेकेदारों या निजी टर्मिनल ऑपरेटरों के माध्यम से काम होता है। Port Economics, Management And Policy Port Economics, Management And Policy +1 मुख्य बिंदु: सरकारी लेबर (Port Trust): बड़े बंदरगाहों (जैसे मुंबई, चेन्नई) में पोर्ट ट्रस्ट के अंतर्गत स्थाई लेबर काम करते हैं, जिन्हें समूह C या D का कर्मचारी माना जाता है। निजी लेबर (Contractual/Private): अधिकांश कार्गो हैंडलिंग अब निजी कंपनियों या ठेकेदारों (Stevedores) द्वारा की जाती है, जो दैनिक या अनुबंध पर लेबर रखते हैं। मिश्रित मॉडल: कई बंदरगाह पंजीकृत (registered) पूल श्रमिकों का उपयोग करते हैं जो दैनिक मजदूरी पर काम करते हैं। Port Economics, Management And Policy Port Economics, Management And Policy +2 निष्कर्ष यह है कि सरकारी बंदरगाहों में भी अब निजीकरण बढ़ने के कारण निजी ठेकेदारों के अधीन लेबर काम करने की संख्या ज्यादा है। अध्याय 4.4 – बंदरगाह श्रम | बंदरगाह अर्थशास्त्र, प्रबंधन और नीति Translated — ... साथ ही विशिष्ट बंदरगाह श्रम व्यवस्था के तहत बंदरगाह कर्मचारी के रूप में पंजीकृत स्थायी कर्मचारी भी शामिल हैं। कई बंदरगाह पंजीकृत पूल कर्मचारियों पर निर्भर क...